चापलूसी की हद शिक्षा पद कहानी : अकबर बीरबल / Chaploosi ki had

चापलूसी की हद शिक्षा पद कहानी : अकबर बीरबल

एक बार अकबर के रसोइये ने बैंगन की सब्जी बनाई, और सब्जी का टेस्ट अच्छा नहीं निकला तो अकबर ने मुँह बिचका कर वहीँ पास बैठे एक नौकर से कहा, “साला… महाबकवास होती है बैंगन की सब्जी।”

तभी नौकर ने मिजाजपुर्सी के अंदाज में कहा, “हुजुर बजा फरमा रहे हैं आप! तभी तो इसका नाम बे’गुन (बिना गुण का) है जो बाद में बैंगन कहलाने लगा।”

अब कुछ दिन बाद फिर से खानसामे ने बैंगन की सब्जी बनाई और इस बार गजब की स्वादिष्ट सब्जी बन गई, तो अकबर खुश होकर बोला, “वाह-वाह.. बैंगन की सब्जी तो बहुत जोरदार होती है।”

उस दिन वाला नौकर तुरंत लपका और चापलूसी भरे स्वर में कहा, “बजा फरमा रहे हैं आप हुजुर! बैंगन तो सब्जियों का राजा होता है, इसीलिए तो उसके सिर पर अल्ला ने कलगी भी दी है, किसी राजमुकुट की तरह।”

अचानक अकबर को पिछला वाक्या याद आया और वो डपटते हुए नौकर से बोला, “क्या बे हरामखोर.. उस दिन तो जब मैंने कहा ‘बैंगन ख़राब’ तो तूने भी कहा, ‘बैंगन ख़राब होता है’ और आज मैंने इसको अच्छा बताया तो तू भी अच्छा बता रहा है, ये चक्कर क्या है बे?”

नौकर खींसे निपोरता हुआ बोला, “हुजुर माईबाप, हम तो आपके नौकर हैं, बैंगन के थोड़ी न! इसलिए आपने कहा ‘अच्छा’ तो हमने कहा ‘अच्छा’, आपने कहा ख़राब, तो हमने कहा ख़राब।

इस कहानी का उद्देश्य आप लोगों तक चापलूसी की खामियां बताना है कृपया राहुल जी जोड़ कर ना देखें

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